अगर पसंद आए तो कृपया इस ब्लॉग का लोगो अपने ब्लॉग पे लगाएं

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2013

"टूटे हुए शायर का अरमां" - आशीष अवस्थी

==============================================================================

==============================================================================
एक टूटे हुए शायर का अरमां अभी कुछ बाक़ी है********
 जो पूरे ना हो सके उन सपनों का ख़्वाब अभी कुछ बाक़ी है।


हम लिख न सके ऐसी शायरी है जिन्दगी********
 कोरे पन्नों में कैद अरमां अभी कुछ बाक़ी है।
==============================================================================

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ... इनास्मानों को निकल जाने दें ... आराम मिलेगा ...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सर आप जैसे लोग पधारे , फिर क्या ये आराम मिलने से कम है , धन्यवाद व स्वागत है

      हटाएं
  2. mujhe achchi lagi aapki ye post / jaese aapne mere mn ki bat ko zuban de di ho :)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आ० स्वागत है आपका , धन्यवाद
      || जय श्री हरिः ||

      हटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह क्या बात है। बेहतरीन पंक्तियाँ

    उत्तर देंहटाएं
  5. उत्तर
    1. आपके आने की बात ही अलग हैं , ब्रदर धन्यवाद व सदा ही स्वागत हैं !

      हटाएं

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...