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सोमवार, 25 नवंबर 2013

तेरा साथ हो , फिर कैसी तनहाई

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।। एक तेरा साथ हो , फिर कैसी तनहाई , साथ जो चल दिये ज़रा , तो राहों ने बाँहे फैलायी ।।

।। फिर जो आगे चले अगर , तो तूफ़ां की परवह न कीजिए , टूट कर चूर हो जाएना तूफ़ानेजहाँ , बस इतने पल का साथ हो सके तो दीजिए ।।



।। हम साथ जो चले अगर , तो दूरी की परवह न कीजिए , राहें दूरी कट जाएंगी , मनवा बस मंजिल का पता कीजिए ।।


।। पथरीली राहें जो हुई अगर , तो कठिनाई की परवह न कीजिए , उम्र उतार चढ़ाव का पाठ पढ़ाती , कुछ क्षण के लिए अपना लीजिए ।।


।। साथ जो पहुँचे अगर , तो रौशनें मुस्कुराहटें होंगी , कि जैसे हो कहने को तैयार हमसे कि ।।


।। एक तेरा साथ हो , फिर कैसी तनहाई , साथ जो चल दिये ज़रा , तो राहों ने बाँहे फैलायी ।।


                                                                                     ( चित्र गूगल से साभार )
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34 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है भाई जी-
    खूबसूरत प्रस्तुति-
    आभार आपका-

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    1. आदरणीय , धन्यवाद व स्वागत हैं।

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  2. वाह !!!
    बहुत सुंदर रचना
    बधाई ------

    आग्रह है--
    आशाओं की डिभरी ----------

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    1. आदरणीय श्री ज्योती सर , धन्यवाद व स्वागत हैं।

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  3. उत्तर
    1. प्रतिभा जी , स्वागत व बहुत बहुत धन्यवाद

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  4. बहुत खूब ... सच है की बस एक बार चलने की शुरुआत करनी होती है ... सफर तो अपने अप तय हो जाता है ...
    लाजवाब ...

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    1. भाई जी , धन्यवाद व स्वागत हैं , भाई जी आपके प्रेम से प्रोत्साहन मिलता हैं , धन्यवाद व बहुत बहुत स्वागत हैं।

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  5. सच कहा आपने साथ होने पर कठिन सफ़र भी आसान बन जाता है ..बस छोटे-छोटे कदमों से साथ चलने की जरुरत होती हैं ..
    बहुत सुन्दर रचना

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    1. यहाँ पर आपने जो भी बात लिखी हैं वो बहुत बड़ा सत्य हैं , कि बस छोटे छोटे कदमों से साथ बल्कि एकता से चलने की ज़रूरत हैं , आदरणीय , धन्यवाद व स्वागत हैं

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  6. भाव ,भावना ,शब्दों का चयन ,अभिव्यक्ति लाजवाब है !
    (नवम्बर 18 से नागपुर प्रवास में था , अत: ब्लॉग पर पहुँच नहीं पाया ! कोशिश करूँगा अब अधिक से अधिक ब्लॉग पर पहुंचूं और काव्य-सुधा का पान करूँ | )
    नई पोस्ट तुम

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    उत्तर
    1. आदरणीय , सर आप का आगमन व आशीर्वाद मिलता रहे , बस और क्या चाहिए ! , धन्यवाद व स्वागत हैं।

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  7. बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली रचना ....

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    उत्तर
    1. आगमन व उर्जा प्रदान करती हुईं टिप्पणी देने हेतु आदरणीय को धन्यवाद व स्वागत हैं।

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  8. स्वागत योग्य रचना ,बहुत खूब

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    1. आदरणीय , बस स्वागत है आपके प्रेम व आशीर्वाद का , धन्यवाद
      ॥ जै श्री हरि: ॥

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  9. बेहद सुन्दर रचना आशीष भाई आभार।

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    उत्तर
    1. धन्यवाद आदरणीय , आपका आगमन हमें ख़ुशी व बल प्रदान करता हैं , व स्वागत है।

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  10. http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/ के शुक्रवारीय अंक २९/११/२०१३ में आपकी रचना को शामिल किया जा रहा हैं कृपया अवलोकन हेतु पधारे ........धन्यवाद

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  11. वाह बहत खूब रूपक तत्व का बहतरीन अभिनव समावेश किया है रचना में।

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    उत्तर
    1. आदरणीय , धन्यवाद व स्वागत हैं।
      ॥ जै श्री हरि: ॥

      हटाएं
  12. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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    उत्तर
    1. धन्यवाद श्री कैलाश सर व स्वागत हैं।

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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    उत्तर
    1. प्रतिभा जी धन्यवाद व स्वागत हैं !

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  14. उत्तर
    1. अनुषा जी धन्यवाद व सद: ही स्वागत हैं !

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