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शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

घरेलू उपचार ( नुस्खे ) भाग - १


प्रिय मित्रों घरेलू उपचार व नुस्खों की बात आती है तो सबसे पहले मन में आयुर्वेद का सवाल आता है
तो आइये सबसे पहले बात करते है आयुर्वेद की....!
                १.आयुर्वेद क्या है ?
यह शब्द ' आयुष + वेद ' , इन दो शब्दों से मिलकर बना है । ' आयुष ' का अर्थ है - ' जीवन ' तथा ' वेद ' का अर्थ है - ' ज्ञान - विज्ञान ' । अतः जीवन सम्बन्धी विज्ञान का नाम ही आयुर्वेद है ।
 
            . आयुर्वेद का शाश्वत रूप ...
यह किसी विशेष समाज , देश एवं संस्कृति की थाती नहीं है , आयुर्वेद का लक्ष्य प्रत्येक प्राणी का कल्याण करना है , आयुर्वेद अनादि - अनन्त और शाश्वत है , इसका किसी विशेष धर्म से सम्बन्ध नहीं , यह प्रकृति के मूल स्रोत - वनस्पतियों का गहन अध्ययन है ।
           ३. आयुर्वेद की प्रमुख विशेषताएं......
इसका कोई कुप्रभाव नहीं होता , आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से किसी भी प्रकार के कुप्रभाव की आशंका नहीं रहती है तथा यह पद्धति एलोपैथी से सस्ती भी है ।
              ४. आयुर्वेद का उद्देश्य....
व्यक्ति का स्वास्थ्य रक्षण - जिससे प्रत्येक मानव जीवन के चारों पुरूषार्थों - १. धर्म २. अर्थ ३. काम ४. मोक्ष की प्राप्ति कर सके ।
तो मित्रों बात करते है आज के घरेलू उपचार ( नुस्खे ) की.............
आज का नुस्खा है ☞ मस्से और तिल 
शरीर पर वेदना रहित , सख्त , उड़द के समान , काली और उठी हुई जो फुन्सी होती है , उसे संस्कृत में ' माष ' और आम बोलचाल में ' मस्सा ' कहते हैं ।
वात , पित्त और कफ के योग से चमड़े पर जो काले तिल जैसे दाग हो जाते है उन्हें ' तिलकालक ' या ' तिल ' कहा जाता है ।
चमडे़ से जरा ऊँचा काला या लाल - सा जो दाग चमड़े पर पड़ जाता है उसे ' जतुमणि ' या ' लहसन ' कहते है ।
वैसे इसके कई घरेलू उपचार है , मगर मैं आपको इसका छोटा सा नुस्खा बताऊगा जो आपके घर मे भी आसानी से मिल जायेगा और इसका कोई साईडिफेक्ट भी नही होगा .......!
१. धनिया पीसकर लगाने से मस्से और तिल नष्ट हो जाते है........!
२. चुकन्दर के पत्ते शहद में मिलाकर लेप करने से मस्से नष्ट हो जाते है 

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